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नक्सली हिंसा त्यागें तो हम वार्ता को तैयार: चिदम्बरम



प्रकाशित: Tue, 09 Feb 2010 at 15:37 IST (Sanjay Srivastava)

 
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कोलकाता। नक्सल प्रभावित चार राज्यों की बैठक के बाद केन्द्र ने आज कहा कि वह माओवादियों के साथ वार्ता को तैयार है, बशर्ते वे हिंसा ’त्यागें।’

गृह मंत्री पी चिदम्बरम ने कहा नक्सल प्रभावित राज्यों की बिनाह पर दो दिन पहले सम्मेलन में भाग लेने वाले सभी मुख्यमंत्रियों की ओर से मेरी सभी नक्सलियों से अपील है कि यदि आप हिंसा छोड़ देते हैं तो हम किसी भी मुद्दे पर आपसे बात करने को तैयार हैं।
वह नक्सली प्रभावित राज्यों के मुख्यमंत्रियों की बैठक के बाद संवाददाताओं से बातचीत कर रहे थे। इस बैठक में बिहार और झारखंड के मुख्यमंत्री क्रमश: नीतीश कुमार और शिबू सोरेन ने भाग नहीं लिया था।

नीतीश कुमार ने पटना में संवाददाताओं से कहा कि वह लंबे समय तक पटना से बाहर नहीं जा सकते थे क्योंकि आज राज्य कैबिनेट की बैठक है। सोरेन ने अपनी बीमारी का हवाला दिया और बैठक में शामिल होने में असमर्थता जाहिर की तथा अपने दो उप मुख्यमंत्रियों को बैठक में भेजा था। रेल मंत्री ममता बनर्जी के कारण बैठक से नीतीश कुमार के दूर रहने की
रिपोर्टो की पृष्ठभूमि में चिदम्बरम ने उनकी गैर मौजूदगी को टालने का प्रयास किया।

चिदम्बरम ने कहा कि नीतीश कुमार ने उन्हें रविवार को दिल्ली में बता दिया था कि उनका पूर्व निर्धारित कोई कार्यक्रम है और संभव है कि वह कोलकाता बैठक में शामिल न हो पाएं। उन्होंने कहा उनके वरिष्ठ अधिकारी यहां हैं। (माओवादी मुद्दे पर विचार-विमर्श के लिए) या तो
मैं पटना जा सकता हूं या वह दिल्ली आ सकते हैं। यह कोई मुद्दा नहीं है। नक्सली मुद्दे पर गृह मंत्री ने कहा ’शर्त’ यही है कि माओवादियों को हिंसा ’रोकनी’ होगी।

गृह मंत्री ने कहा ’दुर्भाग्यवश पिछली अपीलों को ठुकरा दिया गया। इसलिए जब तक नक्सली हिंसा में संलिप्त रहते हैं, हम आपरेशन जारी रखने को बाध्य हैं। ये अभियान जारी रहेंगे और मुझे विश्वास है कि अगले छह महीने में प्रगति होगी। उन्होंने कहा हम इसे स्पष्ट कर चुके हैं कि इन अभियानों का मकसद किसी को मारना नहीं है। वे हमारे अपने लोग हैं। हमें उनकी चिंता है, उनकी जान की चिंता है।
नक्सलियों के खिलाफ अभियान में प्रभावित राज्यों को एक दूसरे से समन्वय स्थापित करने में मदद देने के मकसद से केन्द्रीय गृह मंत्रालय द्वारा बुलायी गयी बैठक निर्धारित समय से एक घंटा देरी से शुरू हो सकी क्योंकि उड़ीसा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक देरी से पहुंचे। बैठक में पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री बुद्धदेव भट्टाचार्य ने भी भाग लिया।

बिहार के मुख्यमंत्री के बयान के बारे में पूछे जाने पर चिदम्बरम ने कहा अकेले बल प्रयोग से समस्या हल नहीं होगी। हम सभी इस पर सहमत हैं। लेकिन हिंसा पर काबू पाने के लिए और नागरिक प्रशासन की पुन: स्थापना के लिए बल प्रयोग जरूरी है। नीतीश कुमार ने कहा था कि माओवादी समस्या को बल प्रयोग के जरिए नहीं सुलझाया जा सकता। उन्होंने कहा यदि माओवादी हिंसा नहीं रोकते हैं तो सरकार को उनके खिलाफ सावधानीपूर्वक, नियंत्रित तरीके से और ठोस अभियान जारी रखना चाहिए। सोरेन ने बैठक में भाग लेने के लिए अपने दो उप मुख्यमंत्रियों रघुबर दास और सुदेश महतो को भेजा था जबकि बिहार सरकार का प्रतिनिधित्व उसके गृह सचिव अमीर सुभानी और डीजीपी आनंद शंकर ने किया।

बैठक में माओवादियों से निपटने के लिए अपनायी जा रही नीति और पड़ोसी राज्यों के बीच समन्वय पर व्यापक विचार-विमर्श किया क्योंकि नक्सली कई बार एक राज्य में हिंसा को अंजाम देकर दूसरे राज्य में भाग जाते हैं।
चिदम्बरम ने नक्सली हिंसा प्रभावित चार राज्यों से कहा जब तक हिंसा जारी है अभियान भी जारी रहेगा। गृह मंत्री ने कहा हम प्रगति कर रहे हैं जो धीमी है लेकिन सतत है और हम इसे जारी रखेंगे। यह कोई क्रिकेट के स्कोर बोर्ड की तरह नहीं है जहां आपको हर ओवर में परिणाम मिलते हैं।
चिदम्बरम ने कहा कि दक्षिणी बिहार, उत्तर प्रदेश और उड़ीसा में माओवादी विरोधी अभियान के दौरान एक पोलित ब्यूरो सदस्य और दो जोनल नेताओं समेत तीन महत्वपूर्ण नक्सली नेताओं को गिरफ्तार किया गया।
इस बैठक में सीआरपीएफ प्रमुख विक्रम श्रीवास्तव, अतिरिक्त सचिव (गृह) डीआरएस चौधरी, अतिरिक्त निदेशक (आईबी) पी महेन्द्रा, संयुक्त सचिव (गृह) कश्मीर सिंह तथा सुरक्षा सलाहकार ब्रिगेडियर डीएस डडवाल ने भी हिस्सा लिया।
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