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(मुखाकृति वेबदैनिकी)
Upendra Rai
Ravi Vaish
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भारतीय प्रस्ताव स्वीकार करेगा पाकिस्तान : स्ट्रेटफॉर प्रकाशित: Fri, 05 Feb 2010 at 11:43 IST (Sanjay Srivastava) वाशिंगटन। पाकिस्तान के साथ विदेश सचिव स्तर वार्ता के नयी दिल्ली के प्रस्ताव को भारत-पाक रिश्तों में सफलता करार देते हुए अमेरिका के एक सामरिक बौद्धिक संगठन ने कहा है कि यह प्रस्ताव अफगानिस्तान में तालिबान के तुष्टिकरण को लेकर भारत की चिंताओं से प्रभावित है।
सुरक्षा और भू-राजनीतिक मामलों पर सामरिक खुफिया जानकारी प्रदान करने वाले थिंकटैंक स्ट्रेटफॉर ने कहा, ’पाकिस्तानी सरजमीं पर काम कर रहे भारत विरोधी उग्रवादियों की धरपकड़ इस्लामाबाद द्वारा कराने में हालांकि थोड़ी ही प्रगति हुई है लेकिन अफगानिस्तान में तालिबान के तुष्टिकरण को लेकर भारत की चिंताएं नयी दिल्ली को इस्लामाबाद से बातचीत की ओर अग्रसर कर रही हैं।’ इस्लामाबाद के साथ बातचीत के भारत के प्रस्ताव पर अपने समाचार विश्लेषण में संगठन ने कहा, भारत जानता है कि अफगानिस्तान को बातचीत में शामिल करने और तालिबान को वार्ता के लिए प्रभावित करने का एकमात्र रास्ता सबसे पहले पाकिस्तान के साथ राजनयिक चैनल को फिर से खोलना है। स्ट्रेटफॉर ने कहा कि भारत ने इस मुद्दे पर सहयोग में अपना खुलापन दिखाया है। संगठन ने कहा, पाकिस्तान संभवत: वार्ता के लिए भारत के प्रस्ताव को स्वीकारेगा लेकिन एजेंडा तय करते वक्त समस्याएं आएंगी। भारत-पाकिस्तान प्रायोजित उग्रवाद और तालिबान से बातचीत के बारे में चर्चा करना चाहता है। पाकिस्तान अन्य किसी विषय पर बात करना चाहेगा। यह अमेरिका पर है कि वह इस कठिन अंतराल को भरने के लिए सेतु बनने का प्रयास करे। स्ट्रेटफॉर ने कहा कि अमेरिका और पाकिस्तान संकेत दे रहे हैं कि अफगानिस्तान में तालिबान से बातचीत के लिए वे अपने विचारों को एक करने का प्रयास कर रहे हैं। थिंक टैंक ने कहा कि अमेरिका को इस जंग में छोटी समयावधि में नतीजों की जरूरत है और वह तालिबान के साथ बातचीत में प्रगति देखना चाहता है। स्ट्रेटफॉर ने कहा, ये घटनाक्रम नयी दिल्ली की चिंता के कारण हैं। उसने कहा कि भारत को वो सुरक्षा संबंधी चिंताएं भलीभांति याद हैं जो 1994 से 2001 के दौरान तालिबान शासित अफगानिस्तान के समय उसके सामने आयीं। इसी दौरान 1999 में पाकिस्तानी उग्रवादियों ने एक भारतीय विमान का अपहरण भी किया था। संगठन ने कहा, अफगानिस्तान में तालिबान के तुष्टिकरण के लिए किसी अमेरिका-पाकिस्तानी डिजाइन को लेकर भारत को डर है, जिससे उग्रवादी समूह को संचालित होने के लिए व्यापक राजनीतिक अवसर मिलेगा। इस वजह से भारत ईरान के साथ कूटनीतिक संपर्क भी बढ़ा रहा है, जो अफगानिस्तान में तालिबान की राजनीतिक वापसी की उसकी आशंका की ओर संकेत देता है। - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - |














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