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भागकर शादी करने वाले दंपति की हो हिफाजत



प्रकाशित: Sun, 06 Dec 2009 at 17:33 IST (Ramesh Chandra)

 
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नयी दिल्ली। दिल्ली की एक अदालत ने कहा है कि भागकर होने वाली शादियां और अंतरजातीय विवाह जाति व्यवस्था से प्रभावित भारतीय समाज में आ रहे आम बदलाव का प्रकटीकरण है जिन्हें कमतर नहीं समझा जाना चाहिये और कानून प्रवर्तन एजेंसियों को ऐसे दंपति की प्रताड़ना से हिफाजत करनी चाहिये।
न्यायाधीश समर विशाल ने पुलिस को एक दंपति को सुरक्षा मुहैया कराने के निर्देश देते हुए कहा कि भागकर होने वाली शादियां आम बदलाव का प्रकटीकरण और कठोर जाति व्यवस्था का नतीजा हैं। ऐसे विवाहों को खराब नजरों से नहीं देखा जाना चाहिये। किसी अनुसूचित जाति के लड़के से विवाह करने वाली उंची जाति की लड़की के माता-पिता के नवविवाहितों की जिंदगी में दखल पर अदालत ने रोक लगा दी। अदालत ने इस पर गौर किया कि दंपति लगातार डर के माहौल में रह रहे हैं और उन्होंने एक गोपनीय स्थान पर पनाह ली है।
लड़की के वयस्क होने और अपनी इच्छा के अनुसार विवाह करने पर गौर करते हुए अदालत ने कहा कि प्रताड़ित हो रहे और अपने माता पिता की इच्छा के विरूद्ध विवाह कर चुके दंपति मूल रूप से तब हमारे समाज से पृथक नहीं है जब उनका विवाह अंतरजातीय या अंतरधार्मिक हो। अट्ठारह वर्षीय इस लड़की ने इस वर्ष गत 15 जुलाई को आर्य समाज मंदिर में एक लड़के से शादी की थी।
दंपति ने शिकायत की कि लड़की के माता-पिता ने उन्हें खुले तौर पर धमकी दी है।
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