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(मुखाकृति वेबदैनिकी)
ranvijay singh
Upendra Rai
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भारत-पाक अलगाववादियों से हो त्रिपक्षीय वार्ता:उमर प्रकाशित: Sun, 29 Nov 2009 at 15:40 IST (Jai Shanker Prasad Shukla) नयी दिल्ली। जम्मू कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने रूख बदलते हुए भारत पाकिस्तान और अलगाववादियों के बीच त्रिपक्षीय वार्ता कराने का पक्ष लिया और कहा कि अगर उग्रवादी संगठन हिजबुल मुजाहिदीन बातचीत के लिए तैयार हो तो वह इसमें मदद देने को तैयार हैं।
बहरहाल 39 वर्षीय उमर ने उदारवादी हुर्रियत अध्यक्ष मीरवाइज उमर फारूक के लिए सतर्कता बरतते हुए उनसे कहा कि वह अपने अन्य सदस्यों को भी बातचीत के लिए लाएं अन्यथा वे कट्टरपंथियों के साथ मिल जाएंगे और वार्ता प्रक्रिया को खतरा हो जाएगा। मुख्यमंत्री ने कहा मैं सोचता हूं कि यह व्यवहारिक है। आपको ऐसी स्थिति नहीं मिलने जा रही है कि नयी दिल्ली,इस्लामाबाद और हुर्रियत बातचीत करें। यह नही होने जा रहा। हां आप ऐसे तंत्र पर काम कर सकते हैं जिसमें आप इस्लामाबाद और नयी दिल्ली के साथ एक ही समय पर बातचीत करें। मुझे नहीं लगता कि इसमें कोई नुकसान है। उमर ने कहा हमने मुख्यधारा को देखते हुए ऐसा किया है। मैंने पाकिस्तान की सरकार और भारत सरकार से बातचीत की है और मुझे नहीं लगता कि इसके कोई नुकसानदायक नतीजे मिले हैं। उमर ने यह भी स्पष्ट किया कि उनकी सरकार न केवल हुर्रियत कान्फ्रेंस के लिए वार्ता में मददगार की भूमिका निभाएगी बल्कि हिजबुल मुजाहिदीन जैसे उग्रवादी गुटों के लिए भी मददगार की भूमिका निभाएगी अगर वे हिंया का रास्ता छोड़ दें। उन्होंने कहा मुझे इसमें कोई दिक्कत नजर नहीं आती क्योंकि हमने जम्मू कश्मीर में ही ऐसा नहीं किया है बल्कि अन्य राज्यों में भी ऐसा किया गया है।मुख्यमंत्री ने कहा अगर वे हिंसा का रास्ता छोड़ना चाहते हैं तो मुझे पूरा विश्वास है कि राज्य सरकार के लिए भारत सरकार से उन्हें बातचीत में शामिल करने के लिए कहना संभव होगा। और अगर आवश्यक हुआ तो राज्य सरकार भी उन्हें बातचीत में शामिल करेगी। पहले हमें देखना होगा कि वे राज्य सरकार से कुछ चाहते तो नहीं हैं। इसीलिए हमारी भूमिका मदद करने की होगी।अलगाववादियों और केंद्र के बीच हो रही रही गोपनीय वार्ताके बारे में पूछे जाने पर उमर ने कहा कि मीडिया की चकाचौंध से दूर रहते हुए बातचीत करने में कोई नुकसान नहीं है। मुख्यमंत्री ने कहा शांतिपूर्ण कूटनीति दोनों पक्षों के लिए जरूरी है ताकि दोनों ही समाधान के बारे में सोच सकें। दोनों पक्ष एक दूसरे को अपनी अपेक्षाओं के बारे में बता सकें और एक दूसरे के विश्वास में ले सकें। मुख्यमंत्री ने कहा एक बार ऐसा हो जाने के बाद शेष वार्ता के बारे में कुछ भी गोपनीय नहीं रखा जाएगा। लेकिन मुझे लगता है कि थोड़े समय चुप रहने से हानि नहीं होगी। वार्ता के लिए हुर्रियत के रवैये का संदर्भ देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा मेरी राय में हमने हुर्रियत से लंबे समय के बाद सर्वाधिक व्यवहारिक बात सुनी है। अगर उन्हें बातचीत में शामिल किया जाए तो मुझे लगता है कि यह अंतिम समाधान की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि होगी।बहरहाल उन्होंने कहा कि मीरवाइज कई नेताओं में से एक हैं। इसमें कोई संदेह नहीं है कि वह प्रभावी नेता हैं और उनका व्यापक जनाधार है लेकिन वह हुर्रियत के उदारवादी गुट के एक व्यक्तिहैं। उमर ने कहा अन्य को भी चाहे वह शीर्ष पंक्ति पर हों या मध्य स्तर पर हों यह अहसास होना जरूरी है कि वह प्रक्रिया में शामिल हैं। अन्यथा वह कट्टरपंथियों से मिल जाएंगे और प्रक्रिया के लिए खतरा हो जाएगा। हुर्रियत नेता अब्दुल गनी भट ने नेशनल कान्फ्रेंस पीडीपी और अलगाववादियों को कश्मीर मुद्दे के लिए हाथ मिलाने का सुझाव दिया था। इस बारे में उमर ने कहा हाथ मिलाना एक बात है और इससे जुड़ना अलग बात है। हमें हुर्रियत कान्फ्रेन्स के नेतृत्व से बातचीत करने में कभी दिक्कत नहीं हुई चाहे नेतृत्व कोई भी हो। उन्होंने कहा हाथ मिलाने का मतलब है कि या तो उन्हें हमारे विचार स्वीकार करने होंगे या हमें उनके विचार स्वीकार करने होंगे। हाथ मिलाना जल्दबाजी होगी। मुख्यमंत्री ने कट्टरपंथी नेता सैयद अली शाह गिलानी आदि की भूमिका के बारे में कहा कि उन्हें वार्ता में इसलिए शामिल नहीं किया जा सकता क्योंकि उनके गिलानी के द्वारा निर्धारित लक्ष्य से वार्ता लगभग असंभव हो जाएगी। इस बारे में विस्तार से पूछे जाने पर उमर ने कहा कोई भी समाधान लोगों को सौ फीसदी स्वीकार नहीं होगा। हमें यह स्वीकार करने की इच्छा होनी चाहिए। उन्होंने कहा ऐसा उन लोगों को साथ होगा जो इसे स्वीकार नहीं करेंगे वार्ता के नतीजे चाहे जो भी हों। अगर सैयद अली शाह गिलानी इन लोगों में से एक हो रहे हैं तो होते रहें। क्या भारत के लिए पाकिस्तान के साथ बातचीत करने का समय आ गया है। इस बारे में उमर ने कहा मैं मानता हूं कि यह महत्वपूर्ण है कि हम पाकिस्तान के साथ बातचीत करें। मेरी राय में यह दोनों देशों के हित में है। प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कश्मीर के बारे में कहा था कि पाकिस्तान के साथ बातचीत के लिए कोई पूर्व शर्त नहीं है लेकिन यह जरूरी है कि वह भारत को निशाना बनाने वाले आतंकी समूहों पर लगाम कसे। इस बारे में उमर ने कहा इसमें कोई संदेह नहीं है कि ऐसा करने पर पाकिस्तान को ऐसी ताकतों पर अंकुश लगाने में मदद मिलेगी जिनका अतीत में भारत खास कर जम्मू कश्मीर में इस्तेमाल किया गया था। - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - |













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