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‘कसाब के बयान पर ध्यान नहीं दें'



प्रकाशित: Tue, 24 Nov 2009 at 18:51 IST (Ramesh Chandra)

 
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लाहौर। लश्कर-ए-तैयबा के कमांडर जकीउर्रहमान लखवी के वकीलों ने पाकिस्तान की एक आतंकवाद निरोधी अदालत से कहा है कि मुंबई के हमलावरों में जीवित एक मात्र आतंकवादी अजमल आमिर कसाब के बयान पर ध्यान नहीं दिया जाए। वकीलों का कहना है कि यह पाकिस्तानी कानूनों के तहत अस्वीकार्य है।
अदालत में दलील देते हुए वकीलों ने कहा कि कसाब के बयान की प्रतियां ‘अप्रमाणित और असत्यापित' हैं और इनका इस्तेमाल उनके मुवक्किल तथा मुंबई हमलों के छह अन्य आरोपियों के खिलाफ आरोप तय करने के लिए नहीं किया जा सकता।
आवेदन की एक प्रति के मुताबिक, ‘कथित दस्तावेज न तो मूल प्रति की प्रमाणित प्रति है और ना ही इसका कानून-ए-शहादत (पाकिस्तानी कानून) के अनुच्छेद 89 के उप अनुच्छेद पांच के प्रावधानों के तहत इस्तेमाल या साबित किया जा सकता। वकीलों ने अपनी आपत्ति के साथ कल आतंकवाद निरोधी अदालत के न्यायाधीश मलिक मोहम्मद अकरम अवान के समक्ष आवेदन किया, जो रावलपिंडी की अदियाला जेल में बंद सात आरोपियों के मामले में सुनवाई कर रहे हैं।
आवेदन कहता है कि कसाब पर याचिकाकर्ता और सह आरोपियों के साथ संयुक्त तौर पर मुकदमा नहीं चल रहा है इसलिए उसका बयान स्वीकार्य नहीं है। पहले एक सुनवाई में बचाव पक्ष के वकीलों ने मांग की थी कि कसाब को सात आरोपियों के साथ मुकदमे का सामना करने के लिहाज से पाकिस्तान लाया जाना चाहिए।
बचाव पक्ष और अभियोजन पक्ष की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने कल तक के लिए सुनवाई स्थगित कर दी।
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