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(मुखाकृति वेबदैनिकी)
Upendra Rai
Ravi Vaish
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वसुंधरा राजे का इस्तीफा भाजपा संसदीय बोर्ड में मंजूर प्रकाशित: Fri, 23 Oct 2009 at 21:38 IST (Jai Shanker Prasad Shukla) नयी दिल्ली। भाजपा संसदीय बोर्ड ने राजस्थान पार्टी विधायक दल के नेता पद से वसुंधरा राजे के इस्तीफे को आज स्वीकार कर लिया।
पार्टी अध्यक्ष राजनाथ सिंह की अध्यक्षता और वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी की उपस्थिति में हुई बोर्ड की बैठक के बाद पार्टी महासचिव अनंत कुमार ने यह जानकारी दी । राजस्थान में लोकसभा और विधानसभा चुनावों में पार्टी के खराब प्रदर्शन की जवाबदेही तय करते हुए पार्टी अध्यक्ष राजनाथ सिंह ने तीन महीने पहले ही उन्हें प्रदेश विधानसभा की नेता पद से तुरंत इस्तीफा देने को कहा था । महीनों की टाल मटोल के बाद वसुंधरा ने बोर्ड की बैठक से कुछ घंटे पहले पार्टी के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी के निवास जा कर उन्हें अपना इस्तीफा सौंपा था । सूत्रों ने बताया कि इस्तीफा सौंपते समय वसुंधरा काफी भावुक थीं और उनकी आंखों में आंसू थे । सूत्रों के अनुसार वसंधुरा ने अपने पत्र में आरोप लगाया कि उनसे जिस तरह से इस्तीफा मांगा गया वह बहुत ही अपमानजनक था। उन्होंने केन्द्रीय नेतृत्व पर पार्टी के भीतर लोकतंत्र को समाप्त करने का भी आरोप लगाया है। इन सूत्रों ने बताया कि वसुंधरा ने यह सवाल भी किया कि जब 1952 के पहले लोकसभा चुनाव से अभी तक आम चुनावों की पार्टी में जवाबदेही तय नहीं की गई तो उन्हीं को क्यों इसके लिए चुना गया। बोर्ड द्वारा इस्तीफा स्वीकार कर लिए जाने के बाद वसुंधरा पार्टी के शीर्ष नेता अटल बिहारी वाजपेयी से मिलने उनके निवास गई। बताया जाता है उन्होंने अपने इस्तीफे में आरोप लगाया कि राजस्थान का मुख्यमंत्री रहते पार्टी के कई केन्द्रीय मंत्रियों ने उनके खिलाफ काम किया। उन्होंने यह आरोप भी लगाया कि एक महिला होने के नाते भी उनसे पार्टी में भेद-भाव किया गया है। राजनाथ सिंह ने वसुंधरा के इस्तीफे को अपनी नाक का सवाल बना लिया था और अपने आदेश का पालन करवाने के लिए उन्होंने हर तरह का दबाव बनाया लेकिन वह उसे आज सुबह तक टालती रहीं। आदेश नहीं मानने पर उन्होंने इस्तीफे के बारे में उनसे बातचीत के लिए सितंबर में वरिष्ठ नेता एम वेंकैया नायडु को और बाद में सुषमा स्वराज को नियुक्त किया। लेकिन वसुंधरा दोनों में से किसी से नहीं मिली। वसुंधरा के इस आचरण पर पार्टी नेतृत्व ने कड़ा रूख अख्तियार किया है और पार्टी सूत्रों का कहना है कि इसके कारण उन्हें निकट भविष्य में पार्टी में केन्द्रीय स्तर पर भी कोई भूमिका मिलना भी मुश्किल है । अनंत कुमार ने बताया कि वसुंधरा का इस्तीफा स्वीकार करने के अलावा संसदीय बोर्ड की बैठक में हाल ही में संपन्न महाराष्ट्र, हरियाणा और अरूणाचल प्रदेश विधानसभाअ चुनावों में पार्टी के प्रदर्शन की समीक्षा की गई। इसके लिए इन राज्यों के प्रभारी और वहां के प्रदेश अध्यक्षों को बैठक में बुलाया गया था। इसके अलावा बैठक में इन तीनों राज्यों में विधायक दल का नेता चुनने के लिए होने वाली बैठकों के लिये पार्टी पर्यवेक्षकों की नियुक्तियां भी की गई। महाराष्ट्र के लिए अरूण जेटली और अनंत कुमार, हरियाणा के लिए थावर चंद गहलोत और विजय गोयल तथा अरूणाचल प्रदेश के लिए विजया चक्रवर्ती को पार्टी की ओर से केन्द्रीय पर्यवेक्षक बनाया गया है। - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - |














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