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सईद ने भारत के खिलाफ आग उगली,पाक को चेताया



प्रकाशित: Sat, 10 Oct 2009 at 18:44 IST (Ramesh Chandra)

 
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लाहौर। प्रतिबंधित जमात उद दावा का प्रमुख हाफिज मोहम्मद सईद पाकिस्तान को दी जाने वाली अमेरिकी मदद में शर्त जोड़े जाने को लेकर छिड़ी में शामिल हो गया है और उसने आरोप लगाया है कि उग्रवादी समूहों के खिलाफ कार्रवाई की शर्त का उपबंध ‘भारतीय दबाव' में शामिल किया गया है। उसने मजलिस में भारत के खिलाफ जमकर आग उगली तथा पाकिस्तान सरकार को आगाह किया।
मुंबई आतंकी हमलों की मुख्य साजिश रचने वाले सईद ने यहां चाउबुर्जी में जमात उद दावा मस्जिद पर शुक्रवार नमाज के दौरान जमा मजलिस से कहा कि अमेरिका ने कैरी लुगर विधेयक में क्वेटा और मुरीदके के आतंकी समूहों के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए पाकिस्तान से कहने संबंधी उपबंध को ‘भारत के दबाव के कारण' शामिल किया है।
बहरहाल, उसने दावा किया कि लोग ऐसा नहीं होने देंगे।
सईद ने कहा कि पाकिस्तान के लोग और सेना किसी को भी क्वेटा और मुरीदके पर हमला करने की इजाजत नहीं देंगे। हम उसका विरोध करेंगे। जमात उद दावा का मुख्यालय लाहौर से 40 किमी दूर मुरीदके में है।
लश्कर ए तैयबा के भी संस्थापक सईद ने मांग की कि सरकार को भारत की ओर दोस्ती का हाथ नहीं बढ़ाना चाहिए क्योंकि वह एक ‘दुश्मन' है और बना रहेगा।
उसने कैरी लुगर विधेयक की ‘कड़ी शर्त स्वीकार करने' के लिए पाकिस्तान सरकार को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि इससे देश को गुलाम बनाया जा रहा है। उसने कहा कि विधेयक को खारिज करो और अल्लाह पर भरोसा करो। सईद ने कैरी लुगर विधेयक पर चिंता जताने के सेना के निर्णय की सराहना की। सेना के शीर्ष कमांडर इस हफ्ते की शुरूआत में कह चुके हैं कि विधेयक के उपबंध से पाकिस्तान के राष्ट्रीय सुरक्षा हित प्रभावित हो सकते हैं। पुलिस द्वारा सईद के खिलाफ आतंकवाद निरोधक कानून के तहत फैसलाबाद में दो प्राथमिकी दर्ज कराये जाने के बाद जमात उद दावा के प्रमुख ने भारत और अमेरिका की आलोचना तेज कर दी है। उस पर काफिरों के खिलाफ जेहदा छेड़ने के लोगों उकसाने और उसके प्रतिबंधित संगठन के लिए धन एकत्र करने का आरोप है।
हालांकि पुलिस अधिकारियों ने पिछले महीने यह धारणा बनाने का प्रयास किया था कि इन दो मामलों के सिलसिले में पिछले महीने सईद को नजरबंद किया जा रहा है, लेकिन बाद में यह बात सामने आयी कि उसकी हिरासत के लिए कोई औपचारिक आदेश नहीं जारी किये गये थे।
पुलिस अधिकारियों ने यह भी कहा कि कानून लागू करने वाली एजेंसियों ने उसके समक्ष खतरों को देखते हुए महज उसकी सुरक्षा बढ़ायी है। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद द्वारा जमात उद दावा को एक आतंकी समूह घोषित किये जाने के बाद उसे पिछले साल नजरबंद किया गया था हालांकि लाहौर उच्च न्यायालय के आदेश पर जून में उसे रिहा कर दिया गया।
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