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(मुखाकृति वेबदैनिकी)
Upendra Rai
Ravi Vaish
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लोकनायक की जयंती पर पैतृक गांव में पसरा सन्नाटा प्रकाशित: Sat, 10 Oct 2009 at 18:04 IST (Ramesh Chandra) बलिया। उत्तर प्रदेश और बिहार की सरहद पर स्थित लोकनायक जयप्रकाश नारायण के पैतृक गांव सिताबदियारा में जहां कभी प्रधानमंत्री से लेकर मुख्यमंत्री और नामी राजनेता जुटा करते थे, वहां उनकी जयंती 11 अक्तूबर से एक दिन पहले सन्नाटा पसरा हुआ है।
लोकनायक जयप्रकाश नारायण न्यास के न्यासी एवं समाजवादी पार्टी के सांसद नीरज शेखर ने बताया कि उन्होंने लोकनायक की जयंती पर शामिल होने के लिए सपा मुखिया मुलायम सिंह यादव और राजद अध्यक्ष एवं सम्पूर्ण क्रांति आंदोलन की पैदाइश माने जाने वाले लालू प्रसाद यादव से सम्पर्क किया था। पूर्व प्रधानमंत्री चन्द्रशेखर के पुत्र नीरज शेखर ने बताया कि मुलायम सिंह यादव ने डाक्टर राम मनोहर लोहिया से जुड़े पार्टी कार्यक्रमों में व्यस्तता के कारण लोकनायक के जयंती पर उनके गांव पहुंचने में असमर्थता जताई। लालू प्रसाद यादव की ओर से भी कार्यक्रम में शामिल होने की पुष्टि नही हुई है और उनका आना संदिग्ध है। उन्होंने बताया कि लोकनायक जयप्रकाश नारायण के नजदीकी रहे चन्द्रशेखर के निधन के बाद लोकनायक के पैतृक ग्राम में कोई बड़ा कार्यक्रम नही हुआ है और उनकी 107 वी जयंती पर भी समारोह के नाम पर केवल रस्म अदायगी ही हो पायेगी। बिना किसी नेता का नाम लिए हुए नीरज शेखर ने व्यंग्य और उलाहना के स्वर में कहा कि यह स्थिति तब है जब जेपी की अगुवाई में हुए संपूर्ण क्रांति आंदोलन में शामिल रहकर ही राजनीति की सीढियां चढ़ने वाले कई नेता आज कई राज्यों एवं देश की राजनीति की धुरी बने हुए हैं। जेपी के पैतृक गांव सिताबदियारा की स्थिति भी अच्छी नहीं है जबकि यूनेस्को ने उनके गांव को ‘हेरिटेज विलेज' तथा तत्कालीन मुख्यमंत्री राजनाथ सिंह ने इसे आदर्श ग्राम के रुप में विकसित करने की घोषण की थी। मगर आज भी लगभग बीस हजार की आबादी का यह ग्राम बुनियादी सुविधाओं के लिए तरस रहा है। सिताबदियारा गांव के निवासी लवकुश सिंह लोकनायक के गांव का होने के नाते गौरवान्वित महसूस करते हैं मगर अपने गांव की दशा पर अफसोस जताते हुए कहते हैं कि लोकनायक के गांव की यह स्थिति है। गांव की दशा की चर्चा करते हुए उन्होंने बताया कि कि गांव का इकलौता प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र एक वार्ड ब्वाय के सहारे चल रहा है और उसमें पिछले आठ माह से किसी चिकित्सक व फार्मासिस्ट की नियुक्ति नहीं है। ग्राम की सड़कें गड्डों में तब्दील हो गयी हैं। सिंह के अनुसार जेपी की पत्नी के नाम पर स्थापित प्रभावती देवी राजकीय बालिका इण्टर कालेज में 700 छात्राओं की शिक्षा केवल प्रधानाचार्य समेत तीन शिक्षकों के भरोसे है। घोषणा की गयी थी कि गांव के निकट का बकुल्हा रेलवे स्टेशन का नामकरण जेपी के नाम पर कर किया जायेगा लेकिन अभी घोषणा का कार्यान्वयन नहीं किया जा सका है। - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - |














