सदस्य बनिए
(मुखाकृति वेबदैनिकी)
- sanjeev srivastava
ranvijay singh
Upendra Rai
|
बिहार के कैमूर जिले में लगती है भूतों की अदालत प्रकाशित: Mon, 21 Sep 2009 at 13:21 IST (Avdhesh Kumar) भभुआ। मानव की अंतरिक्ष में छुट्टियां मनाने और चांद पर बस्तियां बसाने की योजना के बीच, बिहार के कैमूर जिले में अंधविश्वास के चलते भूतों की अदालत लगती है जिसमें कथित तौर पर भूत, डायन और चुड़ैल से मुक्ति दिलाई जाती है।
यह अदालत नवरात्र के दौरान लगती है। इस वर्ष भी नवरात्र शुरू होते ही कैमूर जिले के केचैनपुर प्रखंड स्थित हरसू ब्रह्मधाम में कथित भूत प्रेत आदि बाधाओं से पीड़ित लोग पहुंच रहे हैं। किसी का कहना है कि उसके सर पर उसके पड़ोसी ने भूत बिठा रखा है तो कोई कहता है कि श्मशान के पास से गुजरते समय उस पर भूत सवार हो गया। कोई कुलदेवता की नाराजगी से परेशान है तो कोई किसी तांत्रिक से पीछा छुड़ाने की बात करता है। किसी को आशंका है कि प्रेत बाधा के कारण वह संतान सुख से वंचित है तो किसी को व्यापार में हानि हो रही है। राजधानी दिल्ली के जाने माने मनोविज्ञानी समीर पारेख भूत प्रेत आदि की बातों को सिरे से नकारते हुए कहते हैं कि यह अंधविश्वास के अलावा और कुछ नहीं है। वह कहते हैं ‘‘हम जिस जगह पर रहते हैं उसके आसपास के माहौल का हम पर गहरा असर होता है। वहां प्रचलित कोई विचार इतना गहरा होता है कि लोग उसी पर अमल करते रहते हैं और उसकी सच्चाई की तह तक नहीं जाते।’’ राजस्थान से जीएस पटेल अपने पुत्र सतीश को लेकर हरसू ब्रह्म धाम पहुंचे। उनका कहना था कि उनके पुत्र का प्रेत बाधा के कारण मानसिक संतुलन बिगड़ गया था और हरसू ब्रह्मधाम पहुंच कर उसे इससे मुक्ति मिल गयी। हरसू ब्रह्मधाम में ओझा भूत उतारने के लिये मंत्र बुदबुदाते हुए पीड़ित व्यक्ति के शरीर पर छड़ी घुमाता है फिर पीड़ित की छड़ी से पिटाई करता है। पीड़ित चीखता चिल्लाता है। ओझा उससे पूछता है ‘‘कौन हो तुम’’। अगर इस सवाल के जवाब में पीड़ित ‘‘भूत या चुडै़ल’’ कहता है तो उसकी बुरी तरह पिटाई की जाती है। यहां स्थानीय भाषा में ओझा को सोखा कहा जाता है। पीड़ित को पीटते हुए सोखा कथित भूत से चले जाने को कहता है। इसके बाद पीड़ित ठीक हो जाता है। डा समीर पारेख स्पष्ट करते हैं कि यह मानसिक रोग या भूत प्रेत वाली कोई बात नहीं है। यह जो कुछ है वह उसी गहरी सामाजिक धारणा का असर है जो अंधविश्वास की वजह से लोगों के मन में गहरे तक जमी होती है। कुछ लोग इस स्थिति का फायदा उठाते हुए धन कमाने लग जाते हैं। उत्तर प्रदेश के इलाहाबाद से बलजीत मिश्र अपनी पत्नी को लेकर दो साल पहले यहां आए थे। इस निसंतान दंपत्ति को लगता था कि किसी बाधा की वजह से वे संतान सुख से वंचित हैं। हरसू ब्रह्मधाम आने के बाद उन्हें पुत्र हुआ और इस साल वे आभार व्यक्त करने यहां आए हैं। इस बारे में डा पारेख कहते हैं कि इस तथ्य को विश्वसनीय नहीं माना जा सकता और न ऐसे कोई वैज्ञानिक प्रमाण हैं। कुष्ठ रोग से ग्रसित महाराष्ट्र के अमरावती के सुभाष पवार इससे निजात पाने के लिए यहां पहुंचे हैं और उन्हें उम्मीद है कि बाबा के दरबार से वे खाली नहीं लौटेंगे। हरसू ब्रहम धाम स्थित मंदिर के पुजारी पंडित राजकेश्वर त्रिपाठी जो कि इस स्थान को भूतों की सर्वोच्च अदालत होने का दावा करते हैं, ने भाषा को फोन पर बताया कि यहां पहुंचते ही लोगों के दैहिक दैविक एवं भैतिक तीनों प्रकार के कष्ट स्वत: दूर हो जाते हैं। बकौल पुजारी स्थानीय लोगों को अतिरिक्त यहां देश के अन्य राज्यों की तुलना में सबसे अधिक समीपवर्ती राज्य उत्तर प्रदेश से श्रद्धालुओं आते हैं। उन्होंने बताया कि देश के अन्य राज्यों में उत्तर प्रदेश के अलावा यहां महाराष्ट्र मध्य प्रदेश हरियाणा राजस्थान पश्चिम बंगाल एवं दक्षिणी भारत से भी लोग अपनी समस्याओं के निदान के लिए आते हैं और यहां से ठीक होकर तथा अपनी समस्याओं का निदान पाकर लौटते हैं। - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - |













Click Image to Enlarge
