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हर तरह के आतंकवाद को उखाड़ फेंके:प्रतिभा पाटिल



प्रकाशित: Mon, 07 Sep 2009 at 19:32 IST (Ramesh Chandra)

 
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दुशान्बे। भारत ने आज क्षेत्र के देशों से सहयोग और सभी तरह के आतंकवाद को उखाड़ फेंकने के लिए तत्काल एवं एहतियाती सक्रिय कदम उठाने का आह्वान किया ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि इस तरह की ताकतें प्रगति और संपन्नता की प्रक्रिया को पटरी से न उतार पाएं।
तीन दिन की ताजिकिस्तान यात्रा पर आईं राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल ने अपने ताजिक समकक्ष एमोमली रहमोन के साथ बातचीत के दौरान आतंकी खतरों के प्रति भारत की चिंताओं को व्यक्त किया। बातचीत में शिक्षा संस्कृति निवेश और व्यावसायिक आदान- प्रदान के क्षेत्रों में व्यापक सहयोग पर भी चर्चा हुई। उन्होंने क्षेत्र से आतंकवाद को उखाड़ फेंकने में मध्य एशियाई देश का समर्थन भी मांगा।
राष्ट्रपति ने कहा कि हमारा क्षेत्र आज आतंकवाद की बुराई से ग्रसित है। आतंकवाद चरमपंथ और कट्टरपंथ हमारे क्षेत्र की शांति और सुरक्षा को गंभीर खतरा पैदा कर रहे हैं। यह उल्लेख करते हुए कि पिछले साल मुम्बई में 26 नवम्बर को हुए हमले आतंकवाद का एक और स्वरूप थे पाटिल ने कहा कि यह जरूरी है कि क्षेत्र की सभी सरकारें ‘सहयोग करने और आतंकवाद के सभी स्वरूपों को उखाड़ फेंकने के लिए तत्काल एवं सक्रिय एहतियाती कदम उठाएं ताकि ये ताकतें प्रगति और संपन्नता की प्रक्रिया को पटरी से न उतार पाएं। उन्होंने एक बयान में कहा कि आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में हम ताजिकिस्तान के समर्थन को महत्व देते हैं। अफगानिस्तान में तालिबान के खिलाफ लड़ाई में भारत और ताजिकिस्तान एक साथ हैं और नयी दिल्ली का मानना है कि आतंकवाद तथा चरमपंथ के खिलाफ दोनों देशों का प्रयास क्षेत्र में शांति और स्थिरता के लिए एक बड़ा योगदान होगा । पाटिल मध्य एशियाई देश की यात्रा करने वाली पहली भारतीय राष्ट्रपति हैं । उन्होंने कहा कि ताजिक नेतृत्व के साथ उनकी बातचीत ‘बेहद उपयोगी' रही और इसमें द्विपक्षीय क्षेत्रीय तथा अंतरराष्ट्रीय महत्व के मुद्दे उठे।
वह कल ताजिकिस्तान के स्वतंत्रता दिवस समारोह में शामिल होंगी जो किसी विदेशी हस्ती को दिया गया दुर्लभ सम्मान है।
मध्य एशियाई क्षेत्र को ‘अपना विस्तारित पड़ोस' तथा दुशान्बे को भौगोलिक रूप से दिल्ली के करीब बताते हुए उन्होंने कहा, ‘हमारी विदेश नीति की प्राथमिकताओं में मध्य एशियाई क्षेत्र का उच्च स्थान है।' राष्ट्रपति ने कहा कि ताजिकिस्तान के लोगों के कौशल और योग्यता में सुधार के उसके प्रयासों में भारत खुद को भागीदार मानता है।
यह उल्लेख करते हुए कि भारत सालों से विभिन्न क्षेत्रों में मानव संसाधन विकास कार्यक्रमों में ताजिकिस्तान के उम्मीदवारों को प्रशिक्षण और भागीदारी उपलब्ध कराता रहा है। राष्ट्रपति कहा कि हम इसे लगातार जारी रखना चाहते हैं । पाटिल ने ताजिक राष्ट्रपति को जल्द ही फिर से भारत आने का निमंत्रण दिया ताकि द्विपक्षीय सहयोग के लिए बहुत से नए विचारों को आगे ले जाया जा सके जिन पर वे चर्चा कर चुके हैं। पाटिल ने सूचना प्रौद्योगिकी उद्यम कौशल रक्षा प्रशिक्षण अंग्रेजी भाषा और प्रबंधन के क्षेत्रों में भारत के समर्थन का आश्वासन भी दिया।
भारत के आईटीईसी (इंडियन टेक्निकल एंड इकोनॉमिक कोऑपरेशन) कार्यक्रम के तहत ताजिकिस्तान के लगभग 100 उम्मीदवारों को इन क्षेत्रों तथा अन्य क्षेत्रों में लघु अवधि के प्रशिक्षण कार्यक्रमों की पेशकश की गई। ताजिकिस्तान आईटीईसी कार्यक्रम के तहत सबसे बड़े लाभार्थियों में से एक है।
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