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एडवर्ड केनेडी ‘अनकहे नायक’ थे भारत अमेरिका परमाणु करार के



प्रकाशित: Sat, 29 Aug 2009 at 12:17 IST (Sanjay Srivastava)

 
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वाशिंगटन। समूचे अमेरिका में लोगों ने जहां सीनेटर एडवर्ड केनेडी के निधन का शोक मनाया वहीं भारतीय अमेरिकी समुदाय ने उन्हें भारत अमेरिका असैन्य परमाणु करार के ‘अनकहे’ नायक के रूप में याद किया ।

भारतीय अमेरिकियों ने केनेडी को ‘सीनेट का उदारवादी शेर’ तथा एक ऐसा राजनीतिज्ञ बताया जिसने हमेशा भारत अमेरिकी संबंधों में सुधार के लिए काम किया ।

बोस्टन निवासी और भारतीय अमेरिकी समुदाय के प्रतिष्ठित नेता रमेश कपूर ने कहा हमारे लिए वह (केनेडी) भारत अमेरिका असैन्य परमाणु करार के ‘अनकहे नायक’ हैं । बहुत से भारतीय अमेरिकी हालांकि इस बात से नाराज हैं कि केनेडी ने अमेरिकी सीनेट में भारत अमेरिका असैन्य परमाणु करार विधेयक का समर्थन नहीं किया था ।
अन्य कई भारतीय अमेरिकी नेताओं के साथ परमाणु करार के लिए काम करने वाले कपूर ने कहा लेकिन केनेडी ने विधेयक का विरोध भी नहीं किया था । यदि उन्होंने कांग्रेस सदस्य एडवर्ड मर्की की तरह परमाणु करार का विरोध किया होता तो हमारे लिए इसे कांग्रेस से पारित कराना मुश्किल हो जाता । कपूर ने जब केनेडी से भारत अमेरिका परमाणु करार का समर्थन करने के लिए संपर्क किया तो उन्होंने यह कहकर इसके पक्ष में मतदान करने से इंकार कर दिया कि परमाणु अप्रसार संधि उनके भाई द्वारा शुरू की गई थी । कपूर ने बताया इसलिए उन्होंने (केनेडी) कहा कि वह करार के पक्ष में वोट नहीं देंगे लेकिन उन्होंने वायदा किया कि वह परमाणु आपूर्तिकर्ता समूह से मंजूरी मिल जाने के बाद इसके फिर से सीनेट में आने पर करार के पक्ष में मतदान करेंगे ।
उन्होंने कहा दुर्भाग्य से केनेडी बीमार पड़ गए और जब विधेयक अंतिम स्वीकृति के लिए सीनेट में आया तो वह इसके पक्ष में वोट नहीं डाल सके । कपूर ने कहा केनेडी ने हालांकि विधेयक के पक्ष में मतदान नहीं किया लेकिन वह परमाणु करार के अनकहे नायकों में से एक थे। यदि उन्होंने एडवर्ड मर्की की तरह करार के विरोध में काम किया होता तो यह मर जाता । हम डेमोक्रेट सदस्यों का समर्थन हासिल नहीं कर पाते । उन्होंने कहा लेकिन एडवर्ड केनेडी ने ऐसा नहीं किया और न ही उन्होंने किसी से करार के खिलाफ वोट देने को कहा । कपूर ने उस समय को याद किया जब उन्होंने और केनेडी दोनों ने एक साथ सिगार पीया था । उन्होंने बताया कि केनेडी दो बार उनके घर आए । केनेडी और उनके परिवार को कई साल से जानने वाले मैसाचुसेट्स जनरल हास्पिटल के चीफ आरथ्रोस्कोपिक सर्जन और हार्वर्ड मेडिकल स्कूल के प्रोफेसर दिनेश पटेल ने कहा कि एडवर्ड केनेडी के मन में भारतीय अमेरिकियों के लिए अगाध सम्मान था और वह उन्हें आयरिश तथा इतालवी समुदाय की तरह उच्च शिक्षित भावुक और परिवार से जुड़े हुए लोगों के रूप में मानते थे। उन्होंने कहा केनेडी उन मुद्दों को आगे बढ़ाने में मदद करते थे जिनसे भारत और विश्व को लाभ मिले। भारत का जिक्र उनके द्वारा लिखी गई पुस्तक ‘अमेरिका बैक ऑन ट्रैक’ में भी हुआ जो 2006 में रिलीज हुई ।

केनेडी ने 70 पृष्ठ की इस किताब में लिखा उनके बड़े भाई राष्ट्रपति जॉन एफ केनेडी इस बात को लेकर चिंतित रहते थे कि भारत नया लोकतंत्र सोवियत संघ के साथ जा सकता है पश्चिम के लोकतंत्रों के साथ नहीं । भारत के पोखरण दो परमाणु परीक्षणों के बाद केनेडी बहुत नाराज थे लेकिन उन्होंने कहा भारत सबसे बड़ा लोकतंत्र है। हमारे उससे संबंध हैं हम आगे बढ़ेंगे।
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