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(मुखाकृति वेबदैनिकी)
- sanjeev srivastava
ranvijay singh
Upendra Rai
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जन्मदिन पर ‘मुन्नाभाई’ को प्यार भरी झप्पी प्रकाशित: Wed, 29 Jul 2009 at 11:09 IST (Sonika Srivastava) Tags: संजय दत्त , बॉलीवुड , जन्मदिन , सुनील दत्त , नरगिनाम , विधाता , साजन , खलनायक , वास्तव , मुन्नाभाई एमबीबीएस, लगे रहो मुन्नाभाईस,रॉ चाल ढाल और अदाकारी के मास्टर कहे जाने वाले बॉलीवुड के मुन्नाभाई यानी संजय दत्त की गिनती शानदार कॅरियर रिकॉर्ड रखने वाले अभिनेताओं में है। पिता सुनील दत्त और मां नरगिस से विरासत में मिली एक्टिंग में संजू बाबा पिछले करीब तीन दशकों से छाए हुए हैं।
29 जुलाई 1959 में जन्मे संजय दत्त ने 1981 में फिल्म रॉकी से अपनी फिल्मी पारी की शुरुआत की। इस फिल्म का निर्देशन खुद सुनील दत्त ने किया था। इसके बाद संजय दत्त ने कई फिल्मों में अभिनय की छाप छोड़ी। शानदार अभिनय के लिए उन्हें दो बार फिल्म फेयर अवॉर्ड मिला। उनकी लोकप्रिय फिल्मों में नाम, विधाता, साजन, खलनायक, वास्तव, मुन्नाभाई एमबीबीएस, लगे रहो मुन्नाभाई शामिल हैं। फिलहाल वह समाजवादी पार्टी से जुड़कर राजनीति में भी हाथ आजमा रहे हैं। अपने कॅरियर में तकरीबन 115 फिल्मों में काम कर चुके संजय दत्त ने वक्त के साथ अपनी भूमिकाओं के चयन में बदलाव करते हुए ‘हसीना मान जाएगी’ और ‘चल मेरे भाई’ समेत कई हल्की-फुल्की फिल्मों में कॉमेडी रोल किये। हास्य कलाकार के रूप में भी उन्हें काफी सराहा गया। ‘खलनायक’ में संजय ने हालात के मारे एक अपराधी के व्यक्तित्व के अनेक विरोधाभासी पहलुओं को बखूबी जिया था हालांकि इस फिल्म के रिलीज होने से पहले ही संजय की मुश्किलों का दौर शुरू हो चुका था। वर्ष 2003 में आई फिल्म ‘मुन्नाभाई एमबीबीएस’ ने उन्हें लोकप्रियता के नए मुकाम पर पहुंचा दिया। इस फिल्म में उनकी जादू की झप्पी की थ्योरी ने लोगों पर जादुई असर किया। इसी श्रंखला की अगली फिल्म ‘लगे रहो मुन्नाभाई’ में उनकी ‘गांधीगिरी’ भी आम जनता से लेकर राजनेताओं तक के सिर चढ़कर बोली थी। फिल्म जगत में संजू बाबा के नाम से भी मशहूर संजय दत्त ने कई बार बेहद मुश्किल हालात से उबरकर फिल्मों में मजबूत वापसी की। चाहे मुम्बई बम धमाकों में उनका नाम लिये जाने का मामला हो या फिर अवैध रूप से हथियार रखने के मामले में मिली सजा का किस्सा हो, उन्होंने हर बार अच्छी वापसी की। संजय को मुम्बई बम धमाकों को अंजाम देने वाले लोगों की मदद करने के आरोप में गिरफ्तार कर लिया गया। करीब 16 महीने तक हवालात में रहने के बाद उन्हें उच्चतम न्यायालय से जमानत मिल गई थी। उस मुश्किल वक्त से जल्द ही उबरते हुए संजय ने फिल्मों में काम जारी रखा। साल 1999 में फिल्म ‘वास्तव’ में सशक्त अभिनय के लिये उन्हें सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का फिल्मफेयर अवार्ड दिया गया था। इस वक्त दक्षिण अफ्रीका में अपना 50वां जन्मदिन मना रहे संजय दत्त के बारे में फिल्म समीक्षक ज्योति वेंकटेश ने बताया कि बॉलीवुड का यह मुन्नाभाई अपने समकालीन दीगर अभिनेताओं से कई मायने में अलग है। चाहे संघषर्शीलता का मामला हो, वक्त के मुताबिक अपनी भूमिकाओं के चयन में बदलाव का फन हो या फिर हर वक्त कुछ नया और अनोखा करने की चाह हो। संजय दत्त ने आज अपने जन्मदिन को बेहद सादगी से मनाने का फैसला किया है। काफी दिनों से उनके करीबी दोस्त और समाजवादी पार्टी के महासचिव अमर सिंह की तबीयत खराब चल रही है। जिस के कारण संजय ने बर्थडे पर कुछ खास न करने का मन बनाया है। संजय के जीवन में पिछले जन्मदिन और इस सालगिरह के दौरान काफी बदलाव आया है। इन दिनों संजू बाबा के अपने परिवार से रिश्तों में भी तल्खी आई है। शायद यही वजह है कि उनकी सांसद बहन प्रिया दत्त ने इस बारे में बात करने से मना कर दिया। - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - |













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