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भारत-फ्रांस के बीच व्यापक सामरिक भागीदारी



प्रकाशित: Mon, 13 Jul 2009 at 18:17 IST (Ramesh Chandra)

 
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पेरिस। फ्रांस के राष्ट्रीय दिवस के मौके पर कल यहां होने वाले समारोह में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह बतौर मुख्य अतिथि भाग लेंगे तथा भारतीय सैनिक फ्रांस के अपने समकक्षों के साथ परेड में शामिल भी होंगे। भारत के सैनिकों का इस परेड में भाग लेना देश के प्रति फ्रांस की ओर से दिये जाने वाले विशेष सम्मान का प्रतीक होगा।
श्री सिंह फ्रांस के इस समारोह में बतौर मुख्य अतिथि भाग लेने वाले पहले भारतीय नेता होंगे। फ्रांस में राष्ट्रीय दिवस के मौके पर विभिन्न देशों के राष्ट्राध्यक्षों या सरकार प्रमुखों को आमंत्रित किया जाता है।
फ्रांस के राष्ट्रपति निकोलस सारकोजी के न्योते पर पेरिस में होने वाले समारोह में भाग लेने के लिये रवाना होने के मौके पर श्री सिंह ने कहा कि यह ‘भारत की जनता के लिये सम्मान की बात है'।
उन्होंने रवानगी के मौके पर अपने एक वक्तव्य में कहा, ‘‘भारत और फ्रांस के बीच करीबी तथा व्यापक सामरिक भागीदारी है। हमारे फ्रांस के साथ संबंध कई क्षेत्रों में हैं और इन्होंने हमारे राष्ट्रीय हितों के लिये काम भी किया है।''
सारकोजी को गत वर्ष गणतंत्र दिवस के मौके पर मुख्य अतिथि के तौर पर आमंत्रित किया गया था और उन्होंने समान तरह की प्रतिक्रिया वाला रूख दर्शाते हुए सिंह को भी अपने देश आने का न्योता दिया।
प्रस्थान करते समय एक वक्तव्य में प्रधानमंत्री ने कहा, ‘‘हम व्यापार और निवेश, उच्च प्रौद्योगिकी, अंतरिक्ष, परमाणु उर्जा, रक्षा, शिक्षा, संस्कृति, पर्यटन और वैज्ञानिक अनुसंधान और विकास के क्षेत्रों में हमारी साझेदारी को मजबूती प्रदान करना चाहेंगे।'' सारकोजी ने एक विज्ञप्ति में कहा कि वह सिंह की यात्रा के जरिये भारत के साथ फ्रांस की सामरिक साझेदारी को सम्मान देना चाहते हैं।
उल्लेखनीय है कि हाल ही में इटली में जी-8 की बैठक में अमेरिका ने विकसित देशों को इस बात के लिए मनाया था कि भारत समेत परमाणु अप्रसार संधि पर दस्तखत नहीं करने वाले देशों को संवर्धन और पुर्नप्रसंस्करण वाली सामग्री हस्तांतरित नहीं की जानी चाहिये।
मनमोहन सिंह ने एक बयान में कहा, ‘‘भारत और फ्रांस के बीच करीबी और व्यापक दायरे वाली सामरिक साझेदारी है। फ्रांस के साथ हमारे संबंधों में अनेक क्षेत्र आते हैं और इन्होंने हमारे राष्ट्रीय हितों को भी पूरा किया है।''
सारकोजी ने एक विज्ञप्ति में कहा कि फ्रांस ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की सदस्यता के लिए भारत के प्रयास का पूरी तरह समर्थन किया है और जी-8 में भारत, ब्राजील और चीन के साथ अन्य उभरती अर्थव्यवस्थाओं को शामिल करने की मांग की है।
फ्रांस ने पिछले साल सितंबर में भारत के साथ एक असैन्य परमाणु उर्जा करार किया था। फ्रांस जी..8 और परमाणु आपूर्तिकर्ता समूह (एनएसजी) दोनों का सदस्य है।

परमाणु उर्जा आयोग के चेयरमैन अनिल काकोडकर ने कहा कि यदि जी-8 देश एनपीटी में दस्तखत नहीं करने वाले देशों को परमाणु संवर्धन और पुनर्प्रसंस्करण प्रौद्योगिकी एवं उपकरण के हस्तांतरण पर पाबंदी पर जोर देते हैं तो यह चिंता का विषय होगा। सिंह और सारकोजी की मुलाकात में रक्षा सहयोग को मजबूत करने का मुद्दा भी प्रमुखता से शामिल हो सकता है।
रक्षा सचिव विजय सिंह भी बातचीत के दौरान प्रधानमंत्री के शिष्टमंडल में शामिल होंगे।
गुट निरपेक्ष आंदोलन के बारे में सिंह ने कहा कि दिवंगत प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू द्वारा गुटनिरपेक्ष आन्दोलन की पहल करने के बाद से यह भारतीय विदेश नीति का मूलाधार रहा है।
उन्होंने कहा, ‘‘गुटनिरपेक्षता में अभी भी हमारी पूरी आस्था है।'' प्रधानमंत्री ने कहा कि शीत युद्ध के बाद दुनिया में दो सैन्य खेमों वाला परिदृश्य बदल गया और ऐसे में गुट निरपेक्ष आंदोलन ने उभरती विश्व व्यवस्था में नयी भूमिका निभायी। ''
प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कहा कि गुटनिरपेक्ष आंदोलन की विविधता और सार्वभौमिकता मौजूदा चुनौतियों से निपटने के लिए एक अनुपम अवसर मुहैया कराती है। उन्होंने कहा कि इन मुद्दों में सतत विकास और जलवायु परिवर्तन से लेकर खाद्य सुरक्षा, उर्जा सुरक्षा, आतंकवाद और अंतरराष्ट्रीय शासन की रचना में सुधार के मुद्दे शामिल है।
मिस्र में अपने प्रवास के बारे में सिंह ने कहा कि वह बांग्लादेश, मिस्र, नेपाल, पाकिस्तान, श्रीलंका और वियतनाम के नेताओं के साथ द्विपक्षीय मुलाकात करेंगे। गुटनिरपेक्ष सम्मेलन से इतर पाकिस्तान के प्रधानमंत्री यूसुफ रजा गिलानी से प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की मुलाकात पर सबकी निगाहें रहेंगी।
प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने स्पष्ट किया कि ‘‘भारत को निशाना बनाने वाले आतंकवादी तत्वों से निपटने के लिए यदि पाकिस्तान ‘भरोसेमंद कार्रवाई' करता है तो पाकिस्तान के साथ लंबित सभी मुद्दों के समाधान के लिए भारत हर जरूरी कदम उठाएगा।''
सिंह ने आशा जतायी कि पाकिस्तान के नेता मुंबई हमले की साजिश रचने वालों को न्याय के कठघरे में लाने और भारत के खिलाफ आतंकवादी गतिविधियों के लिए अपनी सरजमीं का इस्तेमाल नहीं होने देने के लिए अपना संकल्प दोहराएगा।
सिंह और गिलानी की मुलाकात 16 जुलाई को होनी संभावित है। इससे पहले पिछले माह रूस के येकातेरिनबर्ग में सिंह और पाकिस्तान के राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी की मुलाकात हुई थी, जिसमें सिंह ने मीडिया के सामने जरदारी से दो टूक शब्दों में कह दिया था कि पाकिस्तान को भारत के खिलाफ आतंकवाद खत्म करना चाहिए।
दोनों देशों के प्रधानमंत्रियों की मुलाकात से पहले भारत और पाकिस्तान के विदेश सचिव क्रमश: शिवशंकर मेनन और सलमान बशीर इस बारे में विचार विमर्श करेंगे कि मुंबई हमलों की साजिश रचने वालों को न्याय के कठघरे में लाने और आतंकवादी ढांचे को नष्ट करने के लिए पाकिस्तान ने क्या कदम उठाए हैं।
गुटनिरपेक्ष आंदोलन के सम्मेलन में हिस्सा ले रहे प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के प्रतिनिधिमंडल में विदेशमंत्री एस एम कृष्णा और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार एम के नारायणन भी हैं।
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