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ईवीएम की कार्यप्रणाली से चुनाव आयोग संतुष्ट



प्रकाशित: Sun, 05 Jul 2009 at 23:04 IST (Ramesh Chandra)

 
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नयी दिल्ली। इलेक्ट्रानिक वोटिंग मशीनों (ईवीएम) की पैरवी करते हुए निर्वाचन आयोग ने भारतीय जनता पार्टी द्वारा ईवीएम की विश्वसनीयता पर जाहिर संदेहों को खारिज करते हुए आज कहा कि मशीनों की ‘‘छेड़छाड़ मुक्त और त्रुटि रहित कार्यप्रणाली'' से वह पूरी तरह संतुष्ट है। राजनीतिक दलों ने इस पर मिलीजुली प्रतिक्रिया की है।
भाजपा नेता लालकृष्ण आडवाणी ने सुझाव दे डाला कि निर्वाचन अधिकारियों को मतपत्रों के दोबारा इस्तेमाल पर विचार करना चाहिए, जिसे कांग्रेस ने यह कहते हुए नकार दिया कि इससे देश ‘‘अंधेरे युग'' में चला जाएगा। इतना ही नहीं, वाम, राष्ट्रीय जनता दल और लोक जनशक्ति पार्टी ने भी मतपत्रों के जरिए चुनावों का समर्थन किया।
इलेक्ट्रानिक वोटिंग मशीनों के तकनीकी तौर पर संवेदनशील होने संबंधी रिपोटरों पर निर्वाचन आयोग ने अपनी प्रेस विज्ञप्ति में कहा, ‘‘निर्वाचन आयोग इलेक्ट्रानिक वोटिंग मशीनों के छेड़छाड़ मुक्त होने और उनकी त्रृटिरहित कार्यप्रणाली से पूरी तरह संतुष्ट है। इलेक्ट्रानिक वोटिंग मशीनों की प्रभाव क्षमता पर आयोग का विश्वास विभिन्न अदालतों के फैसलों एवं तकनीकी विशेषज्ञों के विचारों से और पक्का हुआ है।''
इसमें कहा गया है कि इसके बावजूद आयोग विभिन्न राजनेताओं और अन्य द्वारा व्यक्तिगत तौर पर जाहिर की गई आशंकाओं पर विचार करेगा और चुनावों में इलेक्ट्रानिक वोटिंग मशीनों के इस्तेमाल के बारे में उनके संदेहों को दूर करने के लिए सभी जरूरी उपाय किए जाएंगे।
निर्वाचन आयोग ने कर्नाटक उच्च न्यायालय का हवाला दिया जिसने इलेक्ट्रानिक वोटिंग मशीनों की ‘राष्ट्रीय गौरव' के रूप में सराहना की थी। ‘‘इलेक्ट्रानिक वोटिंग मशीनों में धांधलियों की प्रबल संभावना'' का दावा करने वाले दिल्ली के पूर्व मुख्य सचिव ओमेश सहगल का हवाला देते हुए निर्वाचन आयोग ने कहा कि सहगल ने तीस जून को मुख्य निर्वाचन आयुक्त नवीन चावला से मुलाकात की थी और उन्हें एक पत्र सौंपा था।
निर्वाचन आयोग ने स्पष्ट कहा कि सहगल ने इलेक्ट्रानिक वोटिंग मशीन में गड़बड़ी का कोई प्रदर्शन आयोग या अधिकारियों के समक्ष नहीं किया और न ही आयोग ने किसी जांच का आदेश दिया है जैसा कि मीडिया के एक हिस्से में कहा गया।
निर्वाचन आयोग ने कहा, ‘‘आयोग को इलेक्ट्रानिक वोटिंग मशीनों के संबंध में विभिन्न हलकों से शिकायतें, याचिकाएं और पत्र मिलते हैं। जरूरी होता है तो इन शिकायतों पर जरूरी कार्रवाई की जाती है।''
विदेशों में इलेक्ट्रानिक वोटिंग मशीनों के इस्तेमाल और वहां के अनुभवों का जिक्र करते हुए निर्वाचन आयोग ने कहा कि शिकायतें आने पर अतीत में शिकायताकर्ताओं को मशीनों में छेड़छाड़ का प्रदर्शन करने के लिए कहा गया, लेकिन आज तक आयोग के समक्ष कोई भी ऐसा कर दिखाने में सक्षम नहीं हुआ।
इलेक्ट्रानिक वोटिंग मशीन की कार्यप्रणाली पर माकपा के रूख का तीव्र विरोध करते हुए तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी ने आज आरोप लगाया कि वाम पार्टियां अब बैलट पेपर प्रणाली अपनाना चाहती हैं क्योंकि ‘‘मशीनों'' में गड़बड़ी करने में उन्हें कठिनाई आएगी जिन्हें चुनाव आयोग ने नवीनतम बना दिया है । बनर्जी ने कहा, ‘‘अब जबकि माकपा चुनावों में बुरी तरह हार रही है तो वह बैलट पेपर से वोटिंग कराना चाहती है क्योंकि मशीनों में गड़बड़ी करने में उन्हें परेशानी हो रही है जिसे सीधे चुनाव आयोग की निगरानी में रखा जाता है।''
दिल्ली जाने से पहले रेल मंत्री ने संवाददाताओं से कहा कि चुनाव आयोग ने मशीनों का आधुनिकीकरण कर दिया है जिससे छेड़छाड़ नहीं की जा सकती।
उन्होंने कहा, ‘‘इस कारण माकपा को अपने पक्ष में मशीन में गड़बड़ी करना कठिन प्रतीत हो रहा है।''
बनर्जी ने कहा कि काफी समय पहले उन्होंने बैलट पेपर से चुनाव कराने की बात कही थी लेकिन उस समय किसी ने इसे महत्व नहीं दिया। माकपा नेता सीताराम येचुरी ने दिल्ली में आज कहा कि ईवीएम की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए जा रहे हैं जिस पर काफी गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए खासकर तब जब ज्यादा से ज्यादा देश बैलट पेपर अपनाते जा रहे हैं। उनकी टिप्पणी के बाद ममता का यह बयान आया है। ममता ने कहा, ‘‘अगर लोगों के लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा की जाती है और चुनाव निष्पक्ष एवं स्वतंत्र तरीके से कराए जाते हैं तो फिर यह मुद्दा नहीं है कि मतदान ईवीएम से हो रहा है या बैलट पेपर से। हम चुनाव आयोग के निर्देशों को स्वीकार करेंगे।''
भाजपा के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी के इलेक्ट्रानिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) के स्थान पर दोबारा मतदान पत्र इस्तेमाल करने के सुझाव का आज माकपा, जनता दल (एस) और लोकजन शक्ति पार्टी ने समर्थन किया।
आडवाणी को हाल ही में समाप्त हुए लोकसभा चुनाव के परिणामों पर कोई भी संदेह नहीं है, लेकिन वह महसूस करते है कि जब तक चुनाव आयोग यह सुनिश्चित नहीं करता है कि ईवीएम के साथ अब कोई छेडछाड नहीं हो सकती है और न ही इनका दुरूपयोग किया जा सकता है, तब तक देश में एक बार फिर से चुनाव में मतपत्र का इस्तेमाल होना चाहिए और इसकी शुरूआत अक्टूबर में महाराष्ट्र और उसके बाद कुछ अन्य राज्यों में होने वाले विधानसभा के चुनावों से होनी चाहिए।
इस पर कांग्रेस ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि यह एक चुनाव में हारी हुई पार्टी का हैरत में डालने वाला बयान है जिसने अपनी हार का गलत उत्तर खोजा है। ईवीएम के बारे में एक वर्ग द्वारा प्रश्न उठाने के संदर्भ में भाजपा ने आज कहा कि महाराष्ट्र और हरियाणा में होने वाले विधानसभा चुनावों में इनके इस्तेमाल से पहले चुनाव आयोग को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि इनसे कोई छेडछाड नहीं की जा सकती है। भाजपा ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि वह हाल ही में हुए लोकसभा के चुनाव में मतदान में ईवीएम के इस्तेमाल के बारे में कोई सवाल नहीं उठा रहे है।
पार्टी के प्रवक्ता रविशंकर प्रसाद ने बताया कि यह उम्मीद की जाती है कि चुनाव आयोग इन मशीनों की उचित जांच के बाद देश के नागरिकों को यह सुनिचित करायेगा कि इन मशीनों के साथ किसी भी प्रकार की छेडछाड नहीं की जा सकती है और जब तक यह कार्य पूरा नहीं होता है तब तक महाराष्ट्र और हरियाणा में मतदान का कार्य मतपेटी में मत डाल कर पूरा किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि जर्मनी में इस प्रकार की इवीएम के इस्तेमाल पर प्रतिबंध लग चुका है जबकि अमेरिका ने इस प्रकार की मशीनों के लिए कुछ न्यायिक हिदायतें जारी की है।
माकपा ने कहा कि इवीएम के इस्तेमाल के बारे में उठाये गये प्रश्नों को गंभीरता से लिया जाना चाहिए और उन पर विचार किया जाना चाहिए।
पार्टी के पोलित ब्यूरो के सदस्य सीताराम यचुरी ने कहा कि इवीएम के इस्तेमाल के बारे में अनेक प्रश्न उठाये जा चुके है जो गंभीर भी है। यदि हम लोकतंत्र को मजबूत बनाना चाहते है तो इन प्रश्नों को गंभीर मानते हुए इन पर विचार किया जाना चाहिए।
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