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जादुई संगीत से मंत्रमुग्ध कर देते थे पंचम दा



प्रकाशित: Sat, 27 Jun 2009 at 16:02 IST (Sonika Srivastava)

 
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(आर डी बर्मन की 70 जयंती पर विशेष)
संगीत की उनकी समझ अन्य की तुलना में कहीं बेहतर थी। वे भारतीय तथा पश्चिमी संगीत को मिक्स करके ऐसा जादुई संगीत बना देते थे कि सुनने वाला मंत्रमुग्ध हो जाये। भारत में मिक्स म्यूजिक के दाता आर डी बर्मन यानी पंचम दा को माना जाता है। पंचम दा अपने समकालीन निर्देशकों से सालों आगे थे। उनकी सोच, समझ-बूझ हर कड़ी को तुरंत सुलझा लेते थे।
पंचम दा ऐसा संगीत बनाता थे जोकि हीरो और फिल्म को पूरी तरह से सूट करता था। इसके लिये वह काफी मेहनत करते थे।
संगीत में महारत तो शायद उनको भगवान के घर से ही मिल गई थी। उन्हें देखकर एक बार अभिनेता स्व. अशोक कुमार ने कहा था कि पूत के पांव पालने में नजर आते हैं। नवजात आर डी बार-बार पांचवा स्वर ‘पा' दुहरा रहे हैं,तभी अशोक कुमार ने इनका नाम पंचम रख दिया। अशोक जी के यह संवाद सही थे। इसीलिये भारत के जाने-माने संगीतकारों में आर डी बर्मन यानी पंचम दा का नाम आज भी बहुत अदब से लिया जाता है।
सचिन देव वर्मन जैसे बड़े और महान निर्देशक के पुत्र होने के बावजूद पंचम दा ने अपनी अलग और अमिट पहचान बनाई।
सिर्फ नौ बरस की उम्र में उन्होंने अपना पहला गीत ‘ऐ मेरी टोपी पलट के' बना लिया था,जिसे उनके पिता ने ‘फंटूश' मे लिया भी था। काफी कम उम्र में पंचम दा ने ‘सर जो तेरा चकराये...' की धुन तैयार कर ली जिसे गुरुदत्त की फ़िल्म ‘प्यासा' मे लिया गया।
पंचम दा का मानना था, और शायद इसी कारण उनके गाने जादू भरे होते थे, क्योंकि उनमें बेहतरीन सगीत और गीत के साथ सादगी भी होती थी।
भारतीय शास्त्रीय संगीत के साथ पाश्चात्य संगीत का मिश्रण कब और कैसे करना है, यह पंचम दा को खूब आता था, फिल्म अमर प्रेम के गाने 'कुछ तो लोग कहेंगें' को ही ले लें जिसमें राग खमाज और राग कलावती के साथ पश्चिमी संगीत का अद्भुत मिश्रण है।
पंचम दा हर जगह कुछ न कुछ नया करने की कोशिश करते थे। नई तकनीकि का इस्तेमाल, रेकार्डिग, बिना तबले के गाने की रेकार्डिग, और विशेष प्रभाव के लिये नये वाद्यों का ईजाद आर डी की विविधता के परिचायक हैं।
यहां तक कि सुपरहिट गीत 'चुरा लिया है तुमने जो दिल को' में ग्लास पर चम्मच टकराने की आवाज का इस्तेमाल भी पंचम दा ने किया था।
भारत में लोग संगीत के साथ जीते हैं,आखिरी दम तक संगीत किसी न किसी तरह से हमसे जुड़ा होता है और इस लिहाज से आर डी बर्मन ने हमारे जीवन को कभी न कभी, किसी न किसी तरह छुआ जरुर है। यह अपने आप में आर डी के संगीत की सादगी और श्रेष्ठता दोनों का परिचायक है।
पंचम बहुमुखी प्रतिभा के धनी थे। उन्होंने ऐक्टिंग में भी हाथ आजमाया। महमूद की फिल्म ‘भूत बंगला' में उन्होंने पहली बार अदाकारी की और बाद में फिल्म ‘प्यार का मौसम' में पोपट लाल के चरित्र में भी सबको लुभाया।
कई गानों में उन्होंने खुद माउथ ओरगन बजाया। गायक के रूप में तो हम उनको उतना ही प्यार करते हैं जितना कि संगीतकार के रूप में। फिल्म का गीत 'महबूबा महबूबा' हो या फ़िर 'पिया तू अब तो आजा' पंचम दा के सारे गाये गीत अनूठे हैं।
हिन्दी फ़िल्म संगीत के इतिहास में अगर किसी संगीत निर्देशक को सबसे ज्यादा प्यार मिला, तो वह निस्संदेह आर डी वर्मन,या पंचम दा हैं।
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